कैसे मुमकिन हुवा एक चाय वाले से प्रधानमत्री तक का सफ़र।:-
एक चाय वाले से प्रधानमंत्री तक का सफ़र सुनके तो नामुमकिन सा लगता है लेकिन ये सच है, नमस्कार आज में आपको भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के जीवन के बारे में बताऊंगा पोस्ट थोड़ी लम्बी है लेकिन है बहुत रोचक उम्मीद है की आपको इससे जरुर कुछ ना कुछ सिखने को मिलेगा।
आजाद भारत गुजरात के बडनगर क़स्बे में जन्मे नरेंद्र मोदी अपनी माता पिता दामोदर दास मोदी और हीरा बा की 6 सन्तानो में से तीसरी सन्तान है। नरेंद्र मोदी का परिवार काफी गरीब था और वो एक कच्चे मकान में रहते थे, गरीबी का आलम ये था की दो वक्त की रोटी भी बड़ी मुस्किल से नसीब होती थी। उनकी माता आस पड़ोस में लोगु के बर्तन साफ किया करती और उनके पिता की रेलवे स्टेशन में चाय की दूकान थी, जिससे घर का खर्च भी बड़ी मुस्किल से चलता था। नरेंद्र मोदी जी भी अपने पिता के काम में उनका हाथ बटाते थे, और रेल के डिब्बो में जाके चाय बेचा करते थे।
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बचपन के इन्ही दिनों ने मोदी जी के जिन्दगी में गहरी छाप छोड़ दी, ऐसा नही है की नरेद्र मोदी जी पढाई नही करते थे, वो अपने पिता की दुकान में खाली समय में पढ़ते भी थे। स्कूल में सभी विद्यार्थी और शिक्षक उनको बहुत प्यार करते थे। उनको नाटको और कला में भाग लेना काफी अच्छा लगता था, और वो स्कूल के सभी नाटको में हिस्सा भी लेते थे। बचपन से ही मोदी जी को नेत्रत्व करने का बड़ा सौक था और वो करते भी थे। स्कूल में उनको मित्र सभी धर्मो के लोग थे और वो सभी धर्मो के त्योहारों को अपने दोस्तों के साथ मिल कर मानते भी थे। मोदी जी बचपन से ही अपने देश से बहुत प्यार करते थे, और स्वामी विवेकानंद जी को अपना गुरु मानते थे। बचपन में ही मोदी जी ने ठान लिया था की स्वामी विवेकानंद जी को विश्व गुरु बनाना है। केवल 17 वर्ष की उम्र में मोदी ही देश के भ्रमण में चले गये, उन्होंने भारत के काफी हिस्सों में भ्रमण किया जिनमे ऋषिकेश और बंगाल में रामक्रष्ण आश्रम मुख्य है, और फिर 2 वर्ष बाद वो वापस घर लौट आये। इन यात्राओं ने मोदी जी को पूरी तरह से बदल दिया। अब उनके जीवन का एक मकसद था राष्ट्र की सेवा करने का। कुछ ही दिन घर में रुकने के बाद वो अहमदाबाद के लिए निकल गए और वहां जाकर उन्होंने RSS ज्वाइन कर ली RSS एक संगठन है जो देश की सेवा करता है। 1970 में उनको RSS का प्रचारक बना दिया गया और साथ ही उन्होंने राजनितिक विज्ञानं में डिग्री भी प्राप्त कर ली। 1975 में जब देश में आपातकाल लग गया तो देश की सभी RSS जैसी संस्थाओं पर प्रतिबंध लग गया, लेकिन मोदी जी कहा रुकने वाले थे, उन्होंने फिर भी सरकार की गलत नीतियों का जमकर प्रचार किया। RSS में लड़ी मेहनत करने के बाद उनको BJP में सामिल किया गया।
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सन 1990 में आडवाणी की अयोध्या रथ यात्रा का आयोजन मोदी जी ने ही किया। मोदी जी की इस मेहनत को देख कर BJP के बड़े नेताओ को मोदी की तारीफ किए बिना रहा नही जाता था। इसी मेहनत की वजह से मोदी जी का कद BJP में बढता चला गया। सन 2001 में गुजरात में भारी भुकम्प आया, जिससे मानो गुजरात तहस नहस सा हो गया। गुजरात सरकार के रहत कार्य से नाखुस होकर BJP ने नरेंद्र मोदी को गुजरात का मुख्यमत्री बना दिया। मोदी जी ने सभी जरुरी कदम उठाए और गुजरात को फिर से सवारा। गुजरात में मोदी के मुख्यमन्त्री रहते हुवे उन्होंने गुजरात की काफी सेवा की। जिसमे उन्होंने एशिया का सबसे बड़ा सोलर प्रोजेक्ट गुजरात में लगाया तथा वहा के हर गाँव तक बिजली पहुचाई। मोदी ने काफी हद तक गुजरात में बेरोजगारी भी ख़त्म कर दी, उनके इसी काम से खुस होकर गुजरात की जनता ने उनको 4 बार अपना मुख्यमन्त्री चूना। गुजरात में उनकी मेहनत को देखकर BJP नेताओ ने उनको 2014 के लोकसभा चुनावो में प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बना दिया, मोदी ने यहाँ भी अपनी मेहनत से BJP को पूर्ण बहुमत दिल दिया और वो जनता के द्वारा भारत के 15वें प्रधानमंत्री चूने गये। मोदी जी अभी भी अपनी मेहनत से देश की सेवा कर रहे है और यक़ीनन वो एक दिन भारत को विश्व गुरु बना देंगे हमारी शुभ कामनाए उनके साथ है।
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नरेन्द्र मोदी जी से हमें यह सिख मिलती है की चाहे हमारी पारिवारिक स्थिति कैसी भी हो अगर हमारी मेहनत अपने लक्ष के प्रति सच्ची है तो हम जरुर सफल होंगे।
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